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Govt Jobs : Opening

खुद को ना करें अंडर-एस्टीमेट

कई बार ऐसा होता है कि स्टूडेंट्स दूसरों के ओपिनियन के आधार पर अपने बारे में गलत राय बना लेते हैं। इसी कारण वे न तो स्टडी पर कॉन्‍संट्रेट कर पाते हैं और न ही गोल अचीव कर पाते हैं। उन्हें लगता कि उनमें कुछ भी अच्छा नहीं है और इंफिरियेरिटी कॉम्प्लेक्स से ग्रस्त हो जाते हैं।

बि‍ग आइडि‍या, बि‍ग सक्‍सेस

फि‍ल्‍म बदमाश कंपनी में यूँ चाहे जि‍तनी बुराइयाँ लेकि‍न उसमें शाहि‍द कपूर का बोला एक डॉयलॉग बहुत पते कि‍ बात कहता है- 'एक बि‍जनेस पैसे नहीं एक बड़े आइडि‍या से बनता है'। वाकई एक बेहतर बि‍जनेस एक बेहतर आइडि‍या से बड़ा बनता है। शॉन नेल्सन जब 18 वर्ष के थे तब एक दिन टीवी देखते हुए उन्हें एक आइडिया आया।

आईआईटी में फेल बना आईएएस टॉपर

आईआईटी में फेल… आईआईएम में एडमिशन मांगने गए तो भगाया...एक सप्ताह पहले शादी… पुलिस अफसर बनने की ट्रेनिंग… और यूपीएससी में टॉपर… अमूमन मुंबईया मसाला फिल्मों की कहानियों का नायक कुछ इसी तरह… नाटकीय उतार-चढ़ाव के बीच और हर जगह हारने के बाद… अंत में विजयी होता हैं, क्योंकि दर्शकों की डिमांड कुछ ऐसी ही होती है… वह अपने नायक को अंत में जीतते हुए देखना चाहते थे… रील लाइफ में ऐसी सक्सेस स्टोरी की लंबी फेहरिस्त है… लेकिन रियल लाइफ में कुछ ऐसे ही कर दिखाया है… गौरव अग्रवाल ने…। गौरव अग्रवाल की सफलता कहानी को जानने के लिए हमे पीछे चलना होगा… जिसे फिल्मों में फ्लेश बैक कहा जाता है।

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सक्‍सेस नहीं है लक बाय चांस

एक्‍जाम्‍स का दौर है। सभी पढ़ने वाले स्‍टूडेंट्स का ध्यान अब सिर्फ पढ़ाई पर है। रि‍जल्‍ट को बेहतर बनाने और अगले पड़ाव पर पहुँचने के लिए वे प्रयासरत हैं। लेकि‍न ऐसे स्‍टूडेंट्स जो पूरे साल रेग्‍युलर स्‍टडी नहीं करते, टाइम रहते अपना काम शुरू नहीं करते, आलस कर जाते हैं, और एक्‍जाम को भूत समझकर डरते हैं और सोचते हैं, जो भाग्य में होगा वही मिलेगा।

नो स्‍ट्रगल, नो सक्‍सेस

बि‍ना स्‍ट्रगल के सक्‍सेस नहीं मि‍लती ये तय है। एपीजे अब्‍दुल कलाम से लेकर धीरूभाई अंबानी तक आप कि‍सी की भी ऑटोबायोग्राफी पढ़ लें, सबके पीछे की स्‍टोरी में स्‍ट्रगल ही स्‍ट्रगल है और क्‍लाइमेक्‍स में सक्‍सेस। हाँ, और उसके आगे है एक हसीन जिंदगी, लेकि‍न साथ में फि‍र से एक स्‍ट्रगल है, टॉप पर बने रहने का। मतलब स्‍ट्रगल के बि‍ना जिंदगी नहीं है।

इन बातों से मिलती है सक्सेस...

समय प्रबंधन की विशेषज्ञ एवं चर्चित किताब 'व्हाट द मोस्ट पीपल डू बिफोर ब्रेकफास्ट' की लेखक लौरा वंदेरकम लिखती हैं कि अगर आप किसी चीज को करना चाहते हैं तो आप उसे सबसे पहले करिए। हमारे बीच के लोग जो आज सफलता की सीढ़ियां चूम रहे हैं एवं जिंदगी की सफलता का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं वे इसी फिलॉसफी पर चलते हैं। वे दिन का पहला घंटा अपने ज्यादा जरूरी कामों को पूरा करने में लगा देते हैं।
 
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आप सोच रहे होंगे कि सफल लोग आराम करते या नहीं या फिर आराम के समय वे क्या करते हैं? इन्हीं सवालों के जवाब देंगी लौरा वंदेरकम की किताब की चुनिंदा 12 बातें- 

एकता कपूर : सफलता की ग्यारंटी वाला नाम

बालाजी टेलीफिल्म की हेड एकता कपूर। अपने जमाने के सुपर स्टार जितेंद्र की बेटी एकता ने उस समय छोटे पर्दे का रुख किया, जब लोग टीवी के लिए काम करना कमतर समझते थे। बालाजी टेलीफिल्म की स्थापना से न केवल एकता ने टीवी कंटेट बदला बल्कि कई ऐसे कलाकारों को काम और पहचान दी, जो बड़े पर्दे का संघर्ष सह न पाए।

ऐसे मनवाएं अपनी बात...

लोगों को अपनी समझ से अवगत कराने और उन्हें अपनी बात से सहमत कराने का गुण सफलता प्राप्त करने का एक मूल मंत्र है। किसी को अपनी बात से राजी करने और उसे परेशान करने में एक बारीक सा फर्क है। लोगों को अपने विचार समझा पाना वाकई एक ‍कठिन काम है।

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नाम में भी है बहुत कुछ

सरल नाम पहुंचा सकते हैं बुलंदियों पर
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शानदार कल के लिए आज बनाएं बजट

केंद्र सरकार देश का और विभिन्न राज्य सरकारें अपने-अपने राज्यों के बजट पेश कर चुकी हैं। अधिकांश लोग अपने-अपने नजरिए से इसकी तारीफ-आलोचना करते हैं। इसी बीच सवाल उठता है कि क्या आपने खुद का बजट बनाया है? कहने की जरूरत नहीं कि इस सवाल पर कैसा रिस्पॉन्स मिलेगा? अधिकांश लोगों का कहना होता है कि देखो मैंने सब कुछ दिमाग में स्टोर कर रखा है-इनकम, खर्च, सब कुछ।

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